प्रति
Neha
Delhi · 2013
स्कूल के बाद तुम मुझे अपनी साइकिल पर घर छोड़ती थीं, जिसका रंग बिल्कुल आसमान जैसा था।
नेहा, तुम्हें याद है तुमने कहा था कि बड़े होकर हम साथ में दुनिया घूमेंगे?
इस ख़त का बाक़ी हिस्सा मुहरबंद है।
ख़त ढूँढा जा रहा है…
प्रति
Delhi · 2013
स्कूल के बाद तुम मुझे अपनी साइकिल पर घर छोड़ती थीं, जिसका रंग बिल्कुल आसमान जैसा था।
नेहा, तुम्हें याद है तुमने कहा था कि बड़े होकर हम साथ में दुनिया घूमेंगे?
इस ख़त का बाक़ी हिस्सा मुहरबंद है।
अभी तक किसी ने इसे खोलने की कोशिश नहीं की।