स्कूल की आख़िरी घंटी के बाद हम रोज़ झील के किनारे बैठते थे और गिनते थे कि आज कितनी बत्तखें आईं।
करन, तुम कहते थे कि दोस्ती दूरी से नहीं, चुप्पी से टूटती है।
दराज़ में देखा जा रहा है…
एक मुहरबंद ख़त Karan का इंतज़ार कर रहा है।
स्कूल की आख़िरी घंटी के बाद हम रोज़ झील के किनारे बैठते थे और गिनते थे कि आज कितनी बत्तखें आईं।
करन, तुम कहते थे कि दोस्ती दूरी से नहीं, चुप्पी से टूटती है।